आज उन तमाम पुरानी क़िताबों की धूल झाड़कर फिर से उनके पन्ने पलटने को जी किया, जिन्हें इतने बरस ना जाने क्यूँ में सहेजकर रखा था। छपे अफ़सानो के परे उन क़िताबों के हर सफ़हे में हमारे मासूम क़िस्से क़ैद थे। बेशुमार यादें पोशीदा थीं।उम्रदराज़, पीले पड़ चुके पन्नो पर तुम्हारी बेहद नाज़ुक, मासूम उँगलियों के निशान अब तक ताज़ा हैं, जो सिर्फ मुझे नज़र आते हैं। आम के अचार की गंध आज भी आती है उन पन्नो से, दुनिया के सबसे सुंगधित फूलों और इत्रों की सुगंध भी इतनी नहीं भाती मुझे।
अचानक दिल किया तो टीन का डब्बा खोला । इमली के चियों की चमक आज भी बरक़रार है, जो पसीने से नम तुम्हारी मुट्ठी से फिसले और आँगन में छूट गए थे। तुम्हारी अम्मा के पुकारने पर "अष्टा-चंगा-पै" खेलती-खेलती तुम भाग गयीं थीं और मैंने सबकी नज़रें बचाकर उन्हें बटोरकर अपनी हाफ पैंट की दाहिनी जेब में भर लिया था। मानो खज़ाना मिल गया गया हो। वो लाल रंग का रिबन, जो तांगा पकड़ने को भागते-भागते तुम्हारी चोटी से सरक गया था, उसकी आधी खुली, आधी बंधी गाँठ अब तक वैसी ही है। मेरी मनःस्थिति कि तरह।
तुम्हारे सफ़ेद पीटी शूज के नीले तस्मे, छत पर छूट गयी एक जोड़ी पीली जुराबें, हैंडपंप के पास गिरा तुम्हारा गुलाबी क्लिप। पुरानी टेकरी से तुम्हारे हवा में उड़ाए कागज़ी हवाई जहाज़ और बरसाती पोखरों में छोड़ी तुम्हारी वो तमाम कागज़ी कश्तियाँ, सारी चीज़ें भूरी अटैची के नीचे वाले में खाने में ऐसे हिफाज़त से रखी हैं जैसे वो अटैची नहीं कोई म्यूजियम हो।
पांचवी से दसवीं तक की वो पांच 'सालाना' ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें जिनमें सारी क्लास कैमरा में देखकर मुस्कुराती नज़र आती है, लेकिन तुम्हारे पीछे की कतार में खड़ा सिर्फ तुम्हारी तरफ देखता मैं। तुम्हारी साइकिल की टूटी घंटी, खाकी बस्ते का काला पढ़ चुका स्टील का बक्कल। तुम्हारी पेसिलों के छिलकों से भरे कंपास बॉक्स आज भी मेरे पास बैंक लॉकर मैं रखे कीमती जवाहरात की तरह सुरक्षित हैं। तुम्हारे जन्मदिन पर तुमने दी हर चॉकलेट की रंग -बिरंगी पन्नियाँ क़िताबों के पन्नो के बीच आज भी महफूज़ हैं । इतनी सारी यादें हैं। और हाँ कुछ ख़त भी हैं जो मैंने तुम्हे लिखे थे और खुद ही ख़ुद को उनके जवाब भी।
बत्तीस साल बाद, स्कूल के वाट्स अप ग्रुप पर आने में तुमने पूरा एक साल, साढ़े तीन महीने, पाँच दिन लगा दिए, मिसेज़----।
बच्चे, भूरी अटेची को उत्सुकता से और स्टोर रूम में बैठे, बेवजह मुस्कुराते मुझे बीवी हैरानी से देख रही है और मैं उससे ठीक उसी तरह नज़रें चुरा रहा हूँ जैसे तुमसे चुराया करता था।
No comments:
Post a Comment