Sunday, 29 September 2013

मुनिया की ओर से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई


१५ अगस्त २०१३, मुंबई ... 

हर साल की तरह आज भी मुनिया बहोत खुश है.
नमक में लिपटी तली हरी मिर्च के साथ वडा पाव का स्वाद लेती, फुटपाथ पर बसी अपनी दुनिया में मगन
मुनिया ने अम्मा से पूछा "पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी साल में एक-एक बार ही क्यूँ आते हैं, अम्मा?"
"पता नहीं, किसी पड़े-लिखे से पूछना" अम्मा का जवाब था.
मुनिया ने लाल-हरी चटनी से सनी हथेली को पूरी तन्मयता से चाटकर कहा "गजरे, गुलाब, गुब्बारों से ज्यादा झंडे बिकते हैं, अम्मा.
हर हफ्ते पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी आते तो कितना अच्छा होता, हर हफ्ते मनचाहा खाना" 
खिलखिला दी मुनिया.
इस ख्याल से ही उसकी आँखों में आई चमक देखने वाली थी.
दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक, ६७ वर्ष पहले स्वतंत्र हो चुके देश की आठ साल की, अधनंगी, भूखी मुनिया स्कूल जाने और खलेने-कूदने की उम्र में डेढ़ साल के भाई को पीठ पर लादे, सारा दिन ट्राफिक सिग्नल पर कभी गजरे, कभी गुलाब, तो कभी गुब्बारे बेचती है और इन दो ख़ास दिनों पर "मेड इन चाइना" भारतीय झंडे.

इन दो ख़ास दिनों में अच्छी बिक्री होती है, क्यूंकि झंडा गाड़कर देशभक्ति दर्शाने वालों से देश भरा पड़ा है.
मुनिया को पेट भर मनचाहा खाना मिलता है और खुश होकर, इम्पोर्टेड गाड़ियों के बंद काले शीशों को थपथपाती हुई वो कहती है, "Happy Independence Day" .

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