Monday, 16 September 2013

"आम-के-आम गुठलियों के दाम" …. देश की आर्थिक परिस्थिती का विश्लेषण



"आम के आम गुठलियों के दाम" पढ़कर ये विज्ञापन ख़ुशी से उछल पड़ा गुलफाम
दो सौ ग्राम टूथपेस्ट की खाली tube लाओ,पचास ग्राम की "फ्री" ले जाओ.
माल बेचने वालों ने धंदे की बढ़िया जुगत लडाई है
पर ये बात बेचारे गुलफाम की समझ में कहाँ आई है.
वो तो समझता है फ़ायदे का सौदा है,
"कम्पनी का प्रचार जनता का फ़ायदा"
सुन रखा था उसने बरसों पुराना ये क़ायदा.
पहले नीम की दातून चबाकर दांत साफ़ करता था,
फिर घोड़ा छाप लाल दन्त मंजन से दांत घिसना सीख गया.
देश के विकास के साथ उसका भी विकास हुआ,
विकास के पहले दौर में उसने उंगली पर टूथपेस्ट रखकर दांतों को घिसा
और विकसित हुआ तो उन्गलियों में टूथब्रश आ फंसा.
बाप बना तो बच्चे के दांत निकलने से पहले ही हाथ में टूथब्रश थमा दिया
और एक विकासशील देश के विकासशील नागरिक होने का ऐलान कर दिया.
टूथपेस्ट, टूथब्रश सभ्यता की निशानी है, जो इस्तेमाल न करे वो अज्ञानी है,
सबको ये बताया गया सब ये जान गए
टूथपेस्ट, टूथब्रश सभ्यता की निशानी है ये मान गए.
ऐसे में ये विज्ञापन तो वरदान है, जो इसका फ़ायदा न उठाये वो नादान है.
चतुर गुलफाम भला अपनी गिनती नदानो में क्यूँ होने देता,
मौका गवां देता तो कमबख्त विज्ञापन क्या उसे चैन से सोने देता?
"आम के आम गुठलियों के दाम" गुलफाम सोचकर ही मन-ही-मन मुस्कुराया
कहा मैं तो गुठलियों के भी बनाऊंगा बादाम
अजी गुठलियों की छोडिये छिलकों के भी वासूलूँगा दाम.
ऑफर सीमित स्टॉक रहने तक है वो जानता था
खुद को टूथपेस्ट बनाने वाली कंपनी से बड़ा उस्ताद मानता था,
दफ्तर से घर लौटते हुए अगली शाम,
झेलते हुए बसों के धक्के और सड़कों के जाम
मोहल्ले के नुक्कड़ वाले नए आकर्षक सुपर स्टोर पर रुक गया गुलफाम.
घर पहुंचा तो थैले में खाने के खली डब्बे के साथ
दो सौ ग्राम वाले टूथ पेस्ट की दस ट्यूबे देखकर गुलफाम की बीवी चकराई,
पूछने लगी "क्लर्की छोड़कर क्या सेल्समैनी है अपनाई"?
जवाब में गुलफाम बीवी की नादानी पर मुस्कुराया,
बीवी से टीन का दो किलो का खाली डब्बा मंगवाया
टूथपेस्ट की ट्यूबें की उसमें खाली, बीवी ने भी गुलफाम की अक्लमंदी पर दी ताली.
खाली ट्यूबें लेकर वो उलटे पैरों सुपर स्टोर पर आया,
सेल्स मन उसे देखकर चकराया,
उसने पूछा "क्या दांतों पर लगाने के बजाये तूने सारे ख़ानदान को टूथपेस्ट से है नहलाया?"
चतुर गुलफाम सेल्समैन की नादानी पर भी मुस्कुराया,
बोल "मत पूछ कि मैंने आमों को काटकर खाया या उनका मैंगोशेक बनाया
पचास ग्राम के दस टूथ पेस्ट फ्री में मेरे हवाले कर, इन गुठलियों के दाम दे".
विकासशील देश का नागरिक गुलफाम बड़ी तेज़ी से विकास की एक और सीढ़ी चढ़ गया
उसके घर का स्टेटस बढ़ गया,
घर के हर सदस्य के नाम एक-एक टूथपेस्ट हो गया
किसकी ट्यूब ज्यादा दिन चलेगी बच्चों में होड़ लग गयी.
टूथपेस्ट कि ट्यूब बस्ते में रख बच्चे स्कूल भी ले जाने लगे,
पिपरमेंट का ठंडा स्वाद लेने के लिए कभी-कभी टूथपेस्ट खाने लगे.
मिसेज गुलफाम दो किलो के टीन के डिब्बे में भरा टूथ पेस्ट पड़ोसनो को दिखाती थीं,
अपने पति की चतुराई पर इतराती थी,
ऑफर ख़त्म हो चुका था पडोसने मौके का फ़ायदा नहीं उठा पायी थी
इस बात का पड़ोसनो को अफ़सोस था,
इधर गुलफाम की जेब में हो गया मोटा सा छेद था
पर बेखबर गुलफाम को नहीं कोई खेद था.
ख़ुद की समझ में तो उसने कंपनी को लगाया था चूना
मौके का उठाया था फ़ायदा दूना,
दो किलो के दाम देकर वो ढाई किलो टूथपेस्ट लाया था
कंजूसी से इस्तेमाल करके परिवार ने उसे बरसों चलाया था.
किसी को पता नहीं डिब्बे में नीचे का टूथपेस्ट कब का गया था सड
उसमें न जाने कितने ज़हरीले कीटाणु गए थे पड,
डिब्बे के नीचे वाले टूथपेस्ट के जब उस हिस्से का नंबर आया
देखते ही देखते घर में मातम छाया.
महीनो पहले गुज़र चुकी एक्सपायरी डेट की बदौलत गुज़र गए गुलफाम के दो मासूम बच्चे.
कंपनी ने ऑफर के बहाने करीब आ रही एक्सपायरी डेट का माल लगाया था ठिकाने
मुनाफाखोरी की इस आग में गुलफाम जैसे जल गए न जाने कितने परवाने.
मगर विकासशील देश की विकासशील सरकार को गुलफाम की फिक्र क्यूँ कर होती
माल बेचने वाली विदेशी कम्पनियों के चंदे से ही तो जलती है उनकी सभाओं की ज्योति.
मरे गुलफाम का परिवार तो मरता रहे
सरकार र्जिदा रहनी चाहिए.
उनकी जेबें भरी रहें तो ज़हर का व्यापार भी जायज़ है
ईमानदारी से कोई करे विरोध तो वो नाजायज़ है,
ऐसी व्यवस्था में गुलफाम की क्या थी हस्ती,
उसके बच्चों की जिंदगी पचास ग्राम टूथपेस्ट की तुलना में कई गुना थी सस्ती;
न्याय के दरवाज़े का रास्ता जिस ओर गया वो भी निकली लुटेरों की बस्ती.
चंद रोज़ में अख़बारों में छपी ख़बरें भी खामोश हो गयीं
दौलत की स्लीपिंग पिल से अखबारों, न्यूज़ चैनल्स की संवेदनाएं भी गहरी नींद में सो गई.
गुलफाम को अब 'आम के आम गुठलियों के दाम' जैसे विज्ञापन नींद में भी डराते हैं
वो दहशत से काँप जाता है...
लेकिन विकासशील देश कुछ और नए विदेशी प्रोडक्ट्स के लांच के साथ
विकास के पथ पर कुछ और सीडियां चढ़ जाता है.
मगर सुना है गुलफाम का बचा-खुचा परिवार
आजकल फिर से देसी घोड़ा छाप लाल दन्त मंजन लगाता है.
पड़ोस के बच्चे गुलफाम की खिल्ली उड़ाते हैं,
'आम के आम गुठलियों के दाम के चक्कर में बुरे फसे गुलफाम को याद आये राम' का नारा लगाते हैं
उधर कुछ बच्चे माँ बाप को टीवी पर आज ही आया नया विज्ञापन दिखाते हैं
क्या आप अपने बच्चों के सही पोषण के लिए उन्हें नया हेल्थ ड्रिंक पिलाते हैं?
बॉलीवुड की सुपरसेक्सी हीरोइन ने किया था देश की अति भावुक माताओं से ये सवाल
ज़ाहिर है विज्ञापन सुपर हिट और नए imported हेल्थ ड्रिंक ने market में मचा दिया बवाल.
सुना है "डॉलर" का रेट और बढ़ गया है.
"रुपया और गिर गया" ये कहने में अब शर्म आती है .

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