मेरे ख़यालों से नहीं,
सवालों से मुतासिर हो
जवाब बन
तो बात बने
मुझे दाद न दे
ख़ुद ख़याल बन
तो बात बने
हर शाम चराग़ जलाने को
दियासलाई न ढूंढ
ख़ुद रौशनी बन
तो कुछ बात बने
बीमारी की दवा न ढूंढ
ख़ुद इलाज बन
तो बात बने
कांधा देने, आंसूं पोंछने के बजाये
किसी के आंसुओं की वजह न बन
तो बात बने
मेरी 'हाँ-में -हाँ' न मिला
तेरी 'ना' को मेरी 'हाँ' बना
तो बात बने.
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